दिल जो भर आया है तो क्या डूब गया
तेरा कहना ये मेरी जान क्या खूब गयाहमने सोचा था कि ये शजर भी हरे होंगे
क्या पता था कि उनका भी मन ऊब गयाकहां की हसरतें हैं और है रस्ता कहां का
मुसाफ़िर कब कभी मंज़िले मतलूब गयासितारे तो फ़लक पे चिपके रहते हैं
वो माहताब जो होता था वही डूब गयाउनको तूफानों से हो कोई गिला कैसे
उनका लश्कर तो साहिल पे ही डूब गयामेरे अख़लाक़ की कीमत कोई ज्यादा न थी
मेरे किरदार के आगे मेरा वजूद गया


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